इं० श्रीकान्त गुप्त 'साहू'
राष्ट्रीय भागीदारी पार्टी
प्रस्तावना
भारतवर्ष विशेषकर उत्तरप्रदेश में जितने भी प्रमुख राजनैतिक दल हैं, उन किसी के भी एजेन्डे में अति पिछड़ें, अति दलित एवं पसमांदा मुसलमान नहीं हैं। जो छोटे-छोटे राजनैतिक दल हैं, उसका नेतृत्व जाति विशेष अथवा परिवार विशेष तक सीमित हैं। किसी भी दल का नेतृत्व जिस विचार धारा का होता हैं, उसी विचार धारा / वर्ग के लोगों का उक्त दल के निर्णयों पर कब्जा हैं।
प्रदेश में अति पिछड़ें, अति दलितों एवं पसमांदा समाज की कुल जनसंख्या 50% से अधिक हैं, परन्तु वे हर स्तर पर हाशिये पर हैं। भारत के लोकतंत्र में इनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिये यह आवश्यक हैं कि इन जातियों में अपना नेतृत्व उभारा जाय, जिससे वे अपने वर्ग की आकांक्षाओ पर खरे उतरें। इसी भावना के अर्न्तगत राष्ट्रीय भागीदारी पार्टी का गठन किया गया हैं।
राष्ट्रीय भागीदारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में समस्त जातियों का एक प्रतिनिधि रहेगा। यह शीर्ष नेतृत्व केन्द्रीय अध्यक्ष मण्डल कहलायेगा। पार्टी का केन्द्रीय अध्यक्ष मण्डल पार्टी की सर्वोच्च नीति नियामक संस्था रहेगी तथा पार्टी समस्त अति पिछड़ें, अति दलितों एवं पसमांदा मुसलमान जातियों को उनकी जनसंख्या के आधार पर हर स्तर पर समुचित भागीदारी देने हेतु कार्य करेगी।
"राष्ट्रीय भागीदारी पार्टी का यह संविधान हाशिये पर धकेल दी गयी, इसी समाज को समर्पित हैं।"
भारत का संविधान
उद्देशिका (Preamble)(26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा अंगीकृत)
हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता; प्रतिष्ठा और अवसर की समता; प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर, 1949 ईस्वी को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
WE, THE PEOPLE OF INDIA, having solemnly resolved to constitute India into a SOVEREIGN SOCIALIST SECULAR DEMOCRATIC REPUBLIC and to secure to all its citizens: JUSTICE, social, economic and political; LIBERTY of thought, expression, belief, faith and worship; EQUALITY of status and of opportunity; and to promote among them all FRATERNITY assuring the dignity of the individual and the unity and integrity of the Nation; IN OUR CONSTITUENT ASSEMBLY this twenty-sixth day of November, 1949, do HEREBY ADOPT, ENACT AND GIVE TO OURSELVES THIS CONSTITUTION.
संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार
प्रत्येक भारतीय नागरिक के आत्मसम्मान, विकास और समानता की गारंटी देने वाले 6 मूल अधिकार।
समानता का अधिकार (Right to Equality)
कानून के समक्ष समानता, धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध, और अस्पृश्यता का अंत।
स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom)
भाषण एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सम्मेलन, संघ निर्माण, और गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार।
शोषण के विरुद्ध अधिकार (Against Exploitation)
मानव दुर्व्यापार, बेगार तथा बाल श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध।
धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (Religious Freedom)
अंतःकरण की और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता।
संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार (Cultural & Educational)
अल्पसंख्यकों और वंचित वर्गों को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को सुरक्षित रखने का अधिकार।
संवैधानिक उपचारों का अधिकार (Constitutional Remedies)
बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा संविधान की "आत्मा एवं हृदय" कहा गया अधिकार, जो मूल अधिकारों के संरक्षण की गारंटी देता है।
भारतरत्न बाबासाहेब डॉ. बी.आर. आंबेडकर
मुख्य शिल्पकार, भारतीय संविधान"संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो..."
"संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि उसे लागू करने वाले लोग बुरे होंगे, तो वह अंततः बुरा सिद्ध होगा। और संविधान कितना भी बुरा क्यों न हो, यदि उसे लागू करने वाले लोग अच्छे होंगे, तो वह अंततः अच्छा सिद्ध होगा।"
राष्ट्रीय भागीदारी पार्टी इसी प्रेरणा के साथ राजनीति में शुचिता, निष्पक्षता और संवैधानिक आदर्शों की स्थापना के लिए कृतसंकल्प है।
राष्ट्रीय भागीदारी पार्टी के 5 संवैधानिक संकल्प
हम संविधान की रक्षा और हर नागरिक के अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।